Tag Archives: Aye Zindagi Tu Ret To Nahi

इक सन्नाटा

इक सन्नाटा जहाँ तन्हाई मेरी खौफ़ खाई हुई कहीं अकेले न मर जाऊं पूछती है; पता नहीं क्यों तुम्हे जाने को नहीं कहता और हाथ पकड़ कर बिठा भी नहीं पाता जीने की फ़िर ज़िद क्यूँ जब मौत इतनी कामुक है… (From: Aye Zindagi Tu Ret To Nahi ) ध्रुव हर्ष

बाग़ की तासीर

बाग़ की तासीर निकले कहीं जां तो बेसाँस को कन्धा दे देना उजड़े बाग़ की तासीर कहीं रास न आई तो मुकम्मल ज़िंदगी की दास्तानगोई की क्या माने कुछ मिले तो जैसे फिसले चश्मे पर आंसू से उन्हें रोक गर पाते तो तकलीफ़ों के घर बनते हम तो राहगीर थे बस कुछ लम्हों के पापा …

फ़िदा हुसैन के राधा की पेंटिंग सी

लरजती साँसों में सहवास की कहाँ मिठास होती है अब तो तेरे ढलके बदन पर अक्सर मेरा रोमांस रोता है कसक अब कहाँ तुममें फ़िदा हुसैन के राधा की पेंटिंग सी जो बजते थे पायल लिपटकर एक होने में वो अब तेरे पैरों को अक्सर छील जाते हैं, चूड़ियाँ अब कहाँ खनकती हुई अच्छी लगती …