इक सन्नाटा

इक सन्नाटा

जहाँ तन्हाई मेरी
खौफ़ खाई हुई
कहीं अकेले न मर जाऊं
पूछती है; पता नहीं क्यों तुम्हे जाने को नहीं कहता
और हाथ पकड़ कर बिठा भी नहीं पाता
जीने की फ़िर ज़िद क्यूँ
जब मौत इतनी कामुक है…
(From: Aye Zindagi Tu Ret To Nahi )

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